Authors
  • जसबीर कालरवी

    जसबीर कालरवि कविता, ग़ज़ल व नावल तीनों ही विधाओं में लिखते हैं और तीनों ही भाषाओं पंजाबी, हिन्दी और उर्दू में उनकी पुस्तकें उपलब्ध हैं। उनकी पंजाबी में सात पुस्तकें, हिन्दी में चार पुस्तकें और उर्दू में एक पुस्तक प्रकाशित हो चुकी हैं।

  • डॉ. शैलजा सक्सेना

    डॉ. शैलजा सक्सेना ने दिल्ली विश्वविद्याल से पी.एचडी. की। शैलजा साहित्य की सभी विधाओं में लिखती हैं। उनकी कविताएँ दैनिक जीवन से संबंधित होती हैं जिनमें पारिवारिक संबंधों से लेकर देश समाज की बात वह बहुत ही प्रभावशाली ढंग से करती हैं। भाषा सरल व भावों गहराई लिए उनकी कविता की अपनी एक अलग पहचान है। डॉ. शैलजा सक्सेना एक सिद्धहस्त कहानीकार भी हैं। कविता की तरह उनकी पाठक से जुड़ कर उसके अंतस को टटोलती हैं। आजकल कैनेडा में निवास करती हुई भी वह विश्व हिन्दी जगत से जुड़ी हुई हैं और कैनेडा की संस्था हिन्दी राइटर्स गिल्ड की संस्थापक निदेशिका हैं। उनकी रचनाएँ कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रहती हैं। shailjasaksena@gmail.com

  • सुमन कुमार घई

    जन्म: १९५२, अंबाला (हरियाणा) में
    बचपन खन्ना और लुधियाना (पंजाब) में बीता। गवर्नमेंट कॉलेज लुधियाना से बी.एससी. के बाद १९७३ में कैनेडा को प्रवास।
    १९७५ से १९८१ तक कंप्यूटर क्षेत्र में कार्य। १९८१ से २०१० तक पारिवारिक व्यवसाय (फ़ैक्ट्री) संचालन के बाद सेवा निवृत्ति।
    साहित्य में बचपन से रुचि परन्तु औपचारिक तौर पर लेखन इंटरनेट के उद्भव के बाद। हिन्दी नेस्ट.कॉम, अनुभूति-अभिव्यक्ति में रचनाओं के प्रकाशन से प्रवासी लेखक के रूप में छवि का विकास। भारत के कई संकलनों में कहानियाँ, कविताएँ, आलेख, समीक्षाएँ और साक्षात्कार प्रकाशित।
    कैनेडा में हिन्दी साहित्य सभा के भूतपूर्व महासचिव, हिन्दी राइटर्स गिल्ड के संस्थापक निदेशक। लगभग चार वर्ष तक अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्यिक पत्रिका हिन्दी चेतना का सहसंपादन, कैनेडा के साप्ताहिक समाचर पत्र हिन्दी टाइम्स का चार वर्ष तक संपादन।
    २००३ से साहित्य कुंज.नेट का प्रकाशन व संपादन। पुस्तक बाज़ार.कॉम के संस्थापक, प्रकाशक और संपादक।
    ई-मेल: sumankghai@gmail.com

  • नीरा

    भारतीय, इतालवी, चाईनीज़ रसोई में कुशल नीरा की रेस्पीज़ आसान, स्वादिष्ट और देखने में अच्छी होती हैं। पकाने की कला को आसान बनाने में नीरा का कोई सानी नहीं है।

  • डॉ. ज़ेबा रशीद

    डॉ. ज़ेबा रशीद

    • जन्म: 7 जनवरी, 1943, जोधपुर, राजस्थान
    • विभिन्न राज्यों से 32 पुरुस्कार
    • पेशे से होमियोपैथी की डॉक्टर होने के बावजूद भी लेखन से अटूट रिश्ता
    • 1968 से ही रचनायें हिन्दी और राजस्थानी भाषा में देश-विदेश की 40 भिन्न-भिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित
    • 1996 से कहानियों और कविताओं का दूरदर्शन पर भी निरंतर प्रसारण
    • उपन्यास: लम्हें की चुभन (1996), क्योंकि औरत ने प्यार किया (2009)
    • कहानी संग्रह: "चिंगारी", "खारी झील", "भीगे पल", "रिश्ते क्या कहलाते हैं" और "कंटीली राहें"
    • काव्य संग्रह: "सरदार समन्द जल आपूर्ति (अनुवाद)" और "संग और मोती"
    • अन्य रचनाएँ: "मारवाड़ के अद्वितीय नरेश" और "मारवाड़ी मुसलमान" (ऐतिहासिक) और "सच-झूठ बोलन में माहिर आँखें" (व्यंग्य लेख)
    • राजस्थानी साहित्य: उपन्यास "नेह री नातौ", कहानी संग्रह "नांव बिहूण रिस्ता", "वाह रै मरद री जात", "मीठी बात" और कविता संग्रह "आभैरी आँख़्यां", "पैली पोथी", "बगत अर बायरौ"
       

  • निर्मल सिद्‌धू

    टोरोंटो क्षेत्र की साहित्यिक गतिविधियों में निर्मल सिद्धू एक जाना-पहचाना नाम है। 1999 से प्रवासी जीवन व्यतीत करते हुये इन्होंने अपना नाता साहित्य-लेखन से भी बख़ूबी जोड़ रखा है। ये कवितायें, ग़ज़लें, नज़्में, हाईकू, गीत व कहानियाँ आदि सारी विधाओं मे पूरी दक्षता से लिखते हैं। अभिनय से जो लगाव इनको कॉलेज के दिनों में हुआ था वह आज तक बरक़रार है, जिसका सबूत इन्होंने टोरोंटो में नाटक, टी.वी. सीरियल, फ़िल्म तथा वीडियोज़ में अपने अभिनय का प्रदर्शन कर कई बार दिया है।
    "आग़ाज़" इनका प्रथम कहानी संग्रह है। एक कविता संग्रह "निर्मलभाव" पहले छप चुका है तथा एक और प्रकाशनाधीन है। "आग़ाज़" की कहानियाँ इनके कैनेडा के अनुभवों का निचोड़ है जिनमें मानवीय समाज के बदलते मुल्यों को सुन्दर ढंग से पेश किया गया है। अपने बारे में अक्सर कहते हैं कि
    सब भले कल भूल जायें गुज़री कहानी जानकर
    मैं नये क़िरदार में आ, फिर नया आग़ाज़ हूँ।

  • डॉ. अशोक गौतम

    डॉ. अशोक गौतम

    जन्म : 24 जून, 1961 (हिमाचल प्रदेश के सोलन ज़िला की अर्की तहसील के म्याणा गाँव में)।

    शिक्षा : हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से साठोत्तर प्रमुख हिंदी नाटकों में अस्तित्ववादी-चेतना शोध विषय पर पीएच.डी।

    प्रकाशित व्यंग्य संग्रह : लट्ठमेव जयते, गधे ने जब मुँह खोला, ये जो पायजामे में हूँ मैं, झूठ के होल सेलर।

    लेखन : ब्लिट्ज, दैनिक ट्रिब्यून, दैनिक जागरण, अमर उजाला, राज एक्सप्रेस, पंजाब केसरी, दिव्य हिमाचल, सरिता, सरस सलिल, कादंबिनी, मुक्ता, वागर्थ, कथाबिंब, हिमप्रस्थ, सत्य स्वदेश, इतवारी अख़बार, नूतन सवेरा, नवभारत टाइम्स, हिंदुस्तान, कथाबिंब, नया ज्ञानोदय, इतवारी अख़बार, जनवाणी, हिमाचल दस्तक एवं वेब पत्रिकाओं: साहित्यकुंज, प्रवक्ता डॉट कॉम, जनकृति, सृजनगाथा, हिंद युग्म, रचनाकार, हिंदी चेतना, हस्ताक्षर आदि में रचनाएँ प्रकाशित।

    संप्रति : हिमाचल प्रदेश के उच्चतर शिक्षा विभाग में एसोशिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत।

    संपर्क : गौतम निवास, अप्पर सेरी रोड, नज़दीक मेन वाटर टैंक, सोलन-173212 हि.प्र.

    मोबाइल. 9418070089

    Email: ashokgautam001@gmail.com

  • अशोक परूथी "मतवाला"

    जन्म : 15 जुलाई 1958 को पंजाब के क़स्बे नाभा, जिला पटियाला, में हुआ। 
    लालन-पालन नानिहाल परिवार, नारायणगढ़, जिला अम्बाला, में हुआ। 
    अशोक जी ने अपनी माध्यमिक और स्नातक स्तर की शिक्षा रोहतक, हरियाणा में और उच्च शिक्षा चंडीगढ़ में रह कर प्राप्त की। "द ट्रिब्यून" में अपनी नौकरी के दौरान चंडीगढ़ से ही पत्रकारिता और जन संचार में डिप्लोमा प्राप्त किये। अल्पकाल के लिये "अपरेंटिस सब-एडिटर" का कार्यभार संभाला, "द ट्रिब्यून" न्यास अदारे में पहली सफल ट्रिब्यून यूनियन की नीव रखी। वे इसके पहले प्रधान बने।
     सन 1987 आया जब अशोक जी यू.एस.ए.
    अशोक जी की पहली रचना एक कहानी, लेख अथवा कविता न होकर "पठान की लड़ीकी" नामक उपन्यास था। अशोक जी उस वक़्त आठवीं कक्षा के छात्र थे। तदोपरांत,  दसवीं कक्षा से पहले दो उपन्यास और लिखे, जिनके नाम थे, "दुखिया" तथा "रन्नूमारा!"
    चंडीगढ़ रहते अशोक जी की कहानियाँ और हास्य-व्यंग्य लेख आदि पंजाब केसरी और दैनिक ट्रिब्यून में नियमित रूप से छपने लगी।
    पिछले कुछ वर्षों से अपनी रचनायें कैनेडा से छपने वाली हिंदी पत्रिका "साहित्य कुंज" और भारत के दैनिक समाचारपत्र  "सच का होसला" और उन्हीं की पत्रिका "अटूट बंधन" में रचनाएँ प्रकाशित करवा रहे हैं। अशोक जी की दो बच्चों की पुस्तकें Amazon.com पर "प्रिंट ऑन डीमांड" ई-बुक और ऑडियो फ़ार्मेट में उपलब्ध हैं। अशोक जी का कहानी-संग्रह अंतर भी और व्यंग्य संग्रह "काहे करो विलाप" Amazon.com पर उपलब्ध है।  
     अशोक जी पिछले २५ वर्षों से वे अमेरिका में बसे हुये हैं और वे रिचमंड, टेक्सास, के एक अस्पताल में साँस के रोगियों के "थिरेपिस्ट" बतौर काम करते हैं।

    ashok77901@yahoo.com

  • डॉ. अनिल चड्डा

    आपका जन्म दिल्ली में 1952 में हुआ था । कविता लिखने का शौक बचपन से ही रहा है, शायद 14-15 वर्ष की उम्र से । दिल्ली से विज्ञान में स्नातक तक की पढाई करने के बाद आपने अपनी कविता में निखार लाने के लिए हिंदी में एम.ए. किया और फिर पी.एच.डी. की डिग्री प्राप्त की । 1972 में सरकारी नौकरी शुरू करके 2012 में निदेशक के पद से सेवानिवृत हुए । इस बीच अनेकों कविताओं की रचना की, जिन्हें इनके ब्लोगों https://anilchadah.blogspot.com, https://anubhutiyan.blogspot.in  पर पढ़ा जा सकता है । इनकी रचनायें साहित्यकुञ्ज, शब्दकार एवं हिन्दयुग्म जैसी ई-पत्रिकाओं के अतिरिक्त सरिता, मुक्त, इत्यादि पत्रिकाओं में भी प्रकाशित होती रही हैं ।
    anilkr112@gmail.com

  • प्रमोद यादव

    जन्म- 30-06-1952
    संप्रति- रिटायर्ड फोटो-अधिकारी (जनसंपर्क विभाग), भिलाई स्टील प्लांट, भिलाई, छत्तीसगढ़ (इंडिया)
     
    मूलतः फोटोग्राफर। फोटोग्राफी में अनेकों बार पुरस्कृत। अंचल के कई शहरों में फोटो-प्रदर्शनियों  का आयोजन। भिलाई स्टील प्लांट की गृह-पत्रिका "बी.एस.पी. मैगज़ीन" में लगभग बत्तीस साल तक फोटोग्राफी।
    सन 1970 से साहित्य में अभिरुचि। अनेक आंचलिक व राष्ट्रीय स्तर की पत्र-पत्रिकाओं में डेढ़ सौ से अधिक कहानियों, व्यंग्य लेखों व छायाचित्रों का प्रकाशन। 
    पता- प्रमोद यादव 
    गया नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़) 

    Email:pramodyadav1952@gmail.com

  • सुशील यादव

    जन्म 30 जून 1952 दुर्ग छत्तीसगढ़
    रिटायर्ड डिप्टी कमीश्नर,
    कस्टम्स, सेन्ट्रल एक्साइज़ एवं सर्विस टैक्स
    व्यंग्य, कविता, कहानी का स्वतंत्र लेखन। सामजिक और राजनीतिक विसंगतियों या विद्रूपताओं पर आक्षेप की परिणिति में रचनाएँ अपने ही आप आकार ले बैठी हैं। आपके मूल्यांकन लायक़, लोहा मनवाने की स्तिथियाँ बन पाई हैं अथवा नहीं? प्रथम पुस्तक के प्रकाशन का श्रेय माननीय श्री सुमन घई जी को है। जिनके आग्रह और साहित्य कुञ्ज के माध्यम ने समय-समय पर मेरी रचनाओं को पाठकों तक पहुँचाया। उनका तथा प्रकाशक “पुस्तक बाज़ार”  का हृदय से आभार!     
    रचनाएँ स्तरीय मासिक पत्रिकाओं यथा कादंबिनी, सरिता, मुक्ता तथा समाचार पत्रों के साहित्य संस्करणों में प्रकाशित। अधिकतर रचनाएँ gadyakosh.org , रचनाकार.org , अभिव्यक्ति, उदंती, साहित्य शिल्पी एवं साहित्य कुञ्ज में नियमित रूप से प्रकाशित।
    ई-मेल: susyadav444@gmail.com

  • प्रदीप श्रीवास्तव

    जन्म:  लखनऊ में 1 जुलाई, 1970
    प्रकाशन:

    • मन्नू की वह एक रात (उपन्यास) अप्रैल 2013 में प्रकाशित 
    • दो कहानी संग्रह, नाटक एवं पुस्तक समीक्षाओं का संग्रह शीघ्र प्रकाश्य
    • कहानी एवं पुस्तक समीक्षाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित

    संपादन:

    • हर रोज सुबह होती है (काव्य संग्रह) एवं वर्ण व्यवस्था पुस्तक का संपादन

    संप्रति:

    • लखनऊ में ही लेखन, संपादन कार्य में संलग्न

    ई-मेल: pradeepsrivastava.70@gmail.com

     

  • डॉ. रश्मि शील

    जन्म तिथि: 1 जनवरी 1967 
    जन्म स्थान: उन्नाव
    शिक्षा: पीएच.डी.
    लेखन प्रवृत्ति: कविता, कहानी, समीक्षा, नाटक, बालफ़िल्म, वृत्तचित्र, रूपक, वार्ता आदि
    फ़िल्म: "विद्या", "मुट्ठी भर आकाश", "मास्टर जी"
    पत्रकारिता: संयुक्त संपादक, अपरिहार्य, लखनऊ, अवधी ग्रंथावली के पंचम खण्ड के संपादक मंडल की सदस्या और लेखकीय सहयोग, अनुभव की सीढ़ी (सम्पादित)
    प्रकाशन: "कोखजाए", "प्रजातांत्रिक विकेन्द्रीकरण में जन सहभागिता", "रज्जो जीजी", "वसंत" अभ्यास पुस्तिका (1,2,3), "सुरभि" व्याकरण एवं रचना (6 से 8)
    सम्मान/पुरस्कार: विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित। 
    संबद्ध: राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान, उ.प्र. सहित अनेक संस्थाओं से सम्बद्ध।
    ई-मेल: rashmisheel.shukla@gmail.com

  • कृष्णा वर्मा

    शिक्षा: दिल्ली विश्वविद्यालय​
    प्रकाशन: "अम्बर बाँचे पाती" (मेरा पहला हाइकु संग्रह) प्रकाशित। 
    यादों के पाखी (हाइकु संग्रह) अलसाई चाँदनी (सेदोका संग्रह) उजास साथ रखना (चोका संग्रह) आधी आबादी  का आकाश (हाइकु संग्रह) पीर भरा दरिया(माहिया संग्रह) लघु कथा अनवरत एवं कविता अनवरत संकलनों में अन्य रचनाकारों के साथ मेरी रचनाएं। हिन्दी चेतना, गर्भनाल, सादर इण्डिया, नेवा: हाइकु, शोध दिशा, सरस्वती सुमन, अम्स्टेल गंगा, गवेषणा, लघुकथा.काम, हिन्दी-टाइम्स, पत्र-पत्रिकाओं  एवं नेट : हिन्दी हाइकु, त्रिवेणी, सहज साहित्य, अनुभूति-अभिव्यक्ति, साहित्य कुंज नेट (वेब पत्रिका) में हाइकु, ताँका, चोका, सेदोका, माहिया, कविताएँ एवं लघुकथाओं  का प्रकाशन।
    पुरस्कार: विश्व हिन्दी संस्थान की अंतर्राष्ट्रीय  हिन्दी कविता प्रतियोगिता  में द्वितीय  स्थान प्राप्त।​
    विशेष: हिन्दी राइटर्स गिल्ड (टोरोंटो) की सदस्या एवं परिचालन निदेशिका। डी.एल.एफ. सिटी-गुड़गाँव (भारत) एवं कैनेडा में शिक्षण।​
    सम्प्रति: टोरोंटो (कनाडा) में निवास। आजकल स्वतंत्र लेखन।​
    सम्पर्क: 62, हिलहर्सट ड्राइव, रिचमण्डहिल,ओंटेरियो, कनाडा, एल4बी 2वी3​
    ई-मेल: kvermahwg@gmail.com

  • सुनील कुमार वाजपेयी

    जन्मतिथि: 07 अगस्त, 1964
    शिक्षा: सिविल अभियन्त्रण में परास्नातक
    व्यवसाय: राजकीय सेवा (सिविल इन्जीनियर)
    लेखन विधा: गीत, छन्द, ग़ज़ल, कहानी, लेख, बाल साहित्य।
    प्रकाशित कृतियाँ: 
    1.    सुवर्ण सरिता
    2.    सुवर्ण दोहा मंजरी
    3.    सुवर्ण कुण्डलियाँ 
    4.    प्रणम्य साहित्यिक विभूतियाँ
    5.    प्रणम्य बैसवारा
    6.    अन्तस की अनुभूति
    गतिविधियाँ:  ‘उपाध्यक्ष’, राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान, उ.प्र. सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं से सम्बद्ध।
    पुरस्कार/सम्मान: राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान उ.प्र. द्वारा ‘जयशंकर प्रसाद पुरस्कार’ (रु.51000.00) सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत/सम्मानित।
    ईमेल: sunil13june1963@gmail.com
     

  • उत्तम टेकड़ीवाल

    देश की सांस्कृतिक राजधानी कलकत्ता में पले बढ़े उत्तम टेकड़ीवाल पेशे से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। उनका जन्म 24 दिसंबर 1966 को एक मध्यवर्गीय संयुक्त परिवार में हुआ। चित्रकारी और शिल्पकला उनकी अन्य रुचियाँ हैं।

    uttam.tekriwal@gmail.com

  • सुर्यकांत सुतार "सुर्या"

    मेरा नाम सुर्यकांत दामु सुतार है। मै मुम्बई का रहने वाला हूँ। मैं एक मराठी परिवार से हूँ। मेरी पढ़ाई मुम्बई और पुणे से हुई है।  मेरी मातॄभाषा मराठी है, पर हिन्दी भाषा से मुझे विशेष लगाव रहा है और साथ ही संगीत से भी, जिसमें मुझे बचपन से ही बहुत रुचि रही है। पिछले कुछ १०+ सालों से मैं भारत के बाहर रहकर काम कर रहा हूँ। मेरे विचार में साहित्य की हर शैली का अपना एक विशेष महत्त्व है हास्य हो, व्यंग्य हो या उपन्यास। कवितायें एक वो माध्यम है जिससे आप अपने और दूसरों के अस्तित्व के होने का एक सुखद एहसास दिलाते हैं। अपने शब्दों को इस तरह से प्रस्तुत करने कि यह वो प्रणाली है जिस कि वजह से जीवन मे ख़ुशियाँ ही ख़ुशियाँ आती हैं।

  • सीमा सचदेव

    सीमा सचदेव

  • रौशन जसवाल विक्षिप्त

    रौशन जसवाल विक्षिप्त

  • मिर्ज़ा हफ़ीज़ बेग

    मेरा पूरा नाम_ मिर्ज़ा हफ़ीज़ बेग, पिता का नाम स्व. मिर्ज़ा हबीब बेग, भारत के राज्य छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण शहर भिलाई का रहने वाला हूँ। मेरा जन्म और शिक्षा भी यहीं हुई। यहीं पर स्टील अथॉरिट ऑफ़ इंडिया लिम. के उपक्रम भिलाई इस्पात संयत्र में सन् 1985 से कार्यरत हूँ और अगस्त 2024 तक सेवा बाक़ी है। बचपन में नाटक के शौक़ ने लेखक बना दिया… लेकिन एक दिन हालात से समझौता करके अपने अन्दर के लेखक का क़त्ल कर दिया, अपनी प्रकाशित, अप्रकाशित रचनाओं को रद्दी मे बेच दिया; बचपन से जमा किया किताबों का संग्रह रद्दी में बेच दिया और निश्चिंत हो गया कि वह लेखक मर गया। लेकिन पच्चीस साल बाद एक घटना ने उसे जीवित कर दिया और उसने एक कहानी की रचना की "एक लेखक की मौत" … बाक़ी आपके सामने है। इसके अलावा अपने परिचय में यही कहना पसंद करूँगा कि मै स्वयं अपना परिचय अपनी रचनाओं मे ढूँढ रहा हूँ, शायद कभी पा सकूँ

    mirzahafizbaig@yahoo.com

  • डॉ. विनोद कुमार गुप्त

    एम.एस.सी., डी.फिल. डी.एस.ई
    प्राध्यापक प्राणीशास्त्र, सी.एम.डी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर, (छ.ग.) भारत
    वैज्ञानिक नाटक, क्षितिज पर, रूपक व 200 से अधिक वार्तायें आकाशवाणी से प्रसारित एवं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।
    जीव की उत्पत्ति के विषय पर 15 शोध पत्र एवं एक पुस्तक: हाई मिनरल जीवाणु प्रकाशित।
    ईमेल: vkgcmd@gmail.com

  • बृजमोहन स्वामी "बैरागी"

    [जिलाअध्यक्ष- राजस्थानी भाषा संघर्ष सेना, इकाई -हनुमानगढ़]

    स्थाई पता- बरवाळी नोहर , हनुमानगढ़ (राज०)
    पिन- 335504

    शिक्षा: विज्ञान वर्ग में स्नातक (वर्धमान महावीर विश्वविद्यालय, कोटा)
      विद्यालय_अध्यापक कोर्स (मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्याल, उदयपुर। 
    जीव विज्ञान और साहित्य में गहरी रुचि। 

    विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। 
    तुम और मौसम - स्वर्गविभा में प्रकाशित
    मरने की एक्टिंग - रचनाकार में प्रकाशित
    मौसम- प्रतिलिपि में प्रकाशित काव्य 

    प्रमुख कार्य: राजस्थानी भाषा मान्यता कमेटी में 2009 से सतत् योगदान,
    भाषा संघर्ष समिति संयोजक, 2012
    संघर्ष समिति जिलाध्यक्ष, 2014 से मनोनीत
    स्वामी केशवानन्द पुस्तकालय समिति
    (बरवाळी,नोहर) संचालन में सतत् योगदान।

    "अभिव्यक्ति एक स्वतन्त्र विचार है , जो मानव के लिए निर्विरोध कह सकने वाली एकमात्र विश्वशनीय पूंजी है।"

    संपर्क: birjosyami@gmail.com

  • गोवर्धन यादव

    तीन दशक पूर्व कविताऒं के माध्यम से साहित्य-जगत में प्रवेश; देश की स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का अनवरत प्रकाशन; आकाशवाणी से रचनाओं का प्रसारण; करीब पैतीस कृतियों पर समीक्षाएँ                                
    कृतियाँ: महुआ के वृक्ष (कहानी संग्रह) सतलुज प्रकाशन पंचकुला (हरियाणा); तीस बरस घाटी (कहानी संग्रह,) वैभव प्रकाशन रायपुर (छ.ग.);अपना-अपना आसमान (कहानी संग्रह एवं  एक लघुकथा संग्रह शीघ्र प्रकाश्य​
    सम्मान: क़रीब ३५ साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित                        
    भ्रमण: पूरे भारत की यात्राओं के साथ थाईलैण्ड, नेपाल, मारीशस, तथा इण्डोनेशिया-मलेशिया की यात्राएँ                        
    विशेष उपलब्धियाँ: औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के सरकारी कामकाज में हिन्दी के प्रगामी प्रयोग से संबंधित विषयों तथा गृह मंत्रालय,राजभाषा विभाग द्वारा निर्धारित नीति में सलाह देने के लिए वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, उद्योग भवन नयी दिल्ली में “सदस्य” नामांकित; केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) नयी दिल्ली द्वारा कहानी संग्रह "महुआ के वृक्ष" तथा "तीस बरस घाटी" की खरीद की गई' कई कहानियाँ का उर्दू, मराठी, राजस्थानी, उडिया, सिंधी, भाषाओं में रूपान्तरण ​
    संप्रति: सेवानिवृत पोस्टमास्टर  (एच.एस.जी.1) 
    फोन नम्बर: 07162-246651   (चलित) 09424356400                            
    ई-मेल: yadav.goverdhan@rediffmail.com
    goverdhanyadav44@gmail.com     

  • अमिताभ वर्मा

    .अमिताभ वर्मा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय प्रौद्योगिक संस्थान से खनन अभियांत्रिकी में स्नातक हैं। उन्होंने निजी क्षेत्र की विभिन्न कम्पनियों में पैंतीस वर्ष कार्यरत रहने के बाद 2016 में अवकाश ग्रहण किया। वे आकाशवाणी से बतौर समाचार सम्पादक और समाचार वाचक सम्बद्ध रहे हैं। उनके तेरह-तेरह एपिसोड के दो धारावाहिक नाटक - बाल-श्रम के विरुद्व ’अब ऐसी ही सुबह होगी’ तथा कन्या-संरक्षण पर ’नन्ही परी’ - आकाशवाणी पर प्रसारित हुए। वे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के टेलिविज़न तथा रेडियो कार्यक्रमों में अभिनय तथा पटकथा लेखन द्वारा योगदान करते रहे हैं। उनकी रचनाओं का संकलन, ’कृतिसंग्रह’, बहुत सराहा गया। उन्होंने एक अंग्रेज़ी पुस्तक, ’स्टेइंग इन्सपायर्ड’, भी लिखी है।

  • डॉ. सुरंगमा यादव

    एम.ए. हिन्दी, बी.एड., पीएच.डी.
    असि. प्रो. हिन्दी विभाग, महामाया राजकीय महाविद्यालय, महोना, लखनऊ
    प्रकाशन एवं सम्पादन:    “अर्णव” (विभिन्न विषयों के उच्च स्तरीय शोध पत्रों का संकलन) 3 अंक प्रकाशित। 
    लघुकथा संग्रह, “अपने सपने सबके अपने” में चयनित लघुकथाओं का प्रकाशन 
    प्राचीन एवं मध्यकालीन काव्य; आधुनिक हिन्दी काव्य संकलन; प्रयोजनमूलक हिन्दी का स्वरूप; हिन्दी भाषा का विकास एवं व्याकरण; “वंशीधर शुक्ल का काव्य” (समीक्षात्मक पुस्तक,प्रथम संस्करण 2016)
    राजकीय महाविद्यालय  की वार्षिक पत्रिका  का निरन्तर दस वर्षो से सम्पादन। 
    विभिन्न राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में अनेक शोध पत्रों एवं लेखों का प्रकाशन (साहित्य भारती- उ.प्र. हिन्दी संस्थान लखनऊ, समकालीन अभिव्यक्ति, यू.एस.एम. पत्रिका,अवध ज्योति, कृतिका,शोध संचार बुलेटिन आदि पत्रिकाएँ)
    सम्मान/पुरस्कार: “शिक्षा भूषण” सम्मान, राष्ट्रभाषा स्वाभिमान न्यास द्वारा 20वें अखिल भारतीय हिन्दी सम्मेलन गाजियाबाद, लघुकथाओं हेतु ‘प्रशस्ति पत्र‘ प्राप्त;  “बदायूँ श्री” सम्मान से विभूषित (16 फरवरी, 2013)
     ई-मेल:    dr.surangmayadav@gmail.com
     

  • शरत्‌चन्द्र चट्टोपाध्याय

    शरत्चन्द्र चट्टोपाध्याय (१५ सितंबर, १८७६ - १६ जनवरी, १९३८) बांग्ला के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार थे।
    उनका जन्म हुगली जिले के देवानंदपुर में हुआ। अठारह साल की अवस्था में उन्होंने "बासा" (घर) नाम से एक उपन्यास लिख डाला, पर यह रचना प्रकाशित नहीं हुई। शरत्चन्द्र ललित कला के छात्र थे लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वह इस विषय की पढ़ाई नहीं कर सके। रोज़गार के तलाश में शरतचन्द्र बर्मा गए और लोक निर्माण विभाग में क्लर्क के रूप में काम किया।
    शरत्चन्द्र ने अनेक उपन्यास लिखे जिनमें पंडित मोशाय, बैकुंठेर बिल, मेज दीदी, दर्पचूर्ण, श्रीकांत, अरक्षणीया, निष्कृति, मामलार फल, गृहदाह, शेष प्रश्न, दत्ता, देवदास, बाम्हन की लड़की, विप्रदास, देना पावना आदि प्रमुख हैं। बंगाल के क्रांतिकारी आंदोलन को लेकर उन्होंने "पथेर दाबी"(पथ के दावेदार) उपन्यास लिखा जिसका तीन हज़ार का संस्करण तीन महीने में समाप्त हो गया। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने इसे ज़ब्त कर लिया।
     

  • भुवन पाण्डे

    मूलतः उत्तराखंड राज्य , हल्द्वानी शहर निवासी। वर्तमान में फरीदाबाद, हरियाणा में  आवास।

    शिक्षा : वर्ष 1999 में मोतीलाल नेहरू रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, इलाहाबाद से बी.ई. इलेक्ट्रॉनिक्स।

    वर्तमान में भारत सरकार के दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास केंद्र - सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (सी-डॉट), दिल्ली में कार्यरत।

    उत्तराखण्ड के पहाड़ों, जंगल, पेड़, सादे पहाड़ी जीवन से  हमेशा ही से एक आंतरिक जुड़ाव रहा I बचपन से ही साहित्य में रुचि रही। आरंभ में स्कूली शिक्षा के दौरान शौक़िया कई कविताएँ लिखी। कॉलेज और ऑफ़िस के कई वर्षों के 'क्रियात्मक सूखे' के पश्चात फिर से कुछ लिख अपने विचारों को साझा करने का मन हुआ I पहले कभी अपनी कविताएँ प्रकाशन के लिए नहीं दीं। अपनी बिखरी कुछ पुरानी और आजकल में लिखी कविताओं को संगृहीत कर अपनी रचनाओं की ‘प्रथम पोटली’ बनाने का प्रयास किया है 

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