पुस्तक बाज़ार की पुस्तकें
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  • अगले जनम मोहे कुत्ता कीजो

    कल्पना करें एक ऐसे लेखक की जिसे कुत्ता पालने का लगभग पच्चीस सालों का लम्बा अनुभव हो। कितनी कहानियाँ होंगी उसके पास। और यदि वह लेखक व्यंग्यकार हो तब तो कहना ही क्या! हमारे सुदर्शन जी का यही क़िस्सा है। सुदर्शन जी की व्यंग्य में एक जगह है। वे इतने सालों से कुत्ता पालते रहे हैं और इससे बचे समय में व्यंग्य भी लिखते रहे हैं। कुत्ते को इन्होंने इतने क़रीब से, इतनी तरह से

  • पदमावत का काव्य-शिल्प

    "पदमावत" प्रेमकथा काव्य-परम्परा की प्रति निधि रचना है, उसका उद्देश्य सांस्कृतिक समन्वय की विराट् भावना है। कविवर जायसी ने इस कृति में भाव तथा शिल्प दोनों ही स्तरों पर समन्वय की चेष्टा की है। यह समन्वय भारतीय काव्य परम्परा और मसनवी शैली के मध्य किया गया है। अस्तु, इस भावना के कारण पदमावत की महत्ता बढ़ गयी है।

    - डॉ. निशा शर्मा

  • क्षमा करना पार्वती

    आधुनिक समाज के मानवीय संबंधों में जीवन के अर्थ खोजती, जीवन का उत्सव मनाती और दैनिक जीवन से संघर्षरत पात्रों की कहानियाँ - जिनसे आप स्वयं को जुड़ा हुआ पाएँगे - सुमन कुमार घई संपादक - sahityakunj.net

    यह कहानियाँ मात्र कहानियाँ नहीं है, यह सुख - दुख के साथ जिया गया जीवन है। इन कहानियों में कहीं न कहीं आप ख़ुद को ढूँढ़ पाएँगे बस इतना कह सकता हूँ। मन के किसी भी कोने में

  • स्मृति-मंजूषा

    प्रवासी भारतीयों का अपना एक संसार है। उनकी जीने की अपनी एक शैली है। लाखों नहीं करोड़ों की आबादी विदेशों में प्रवासी भारतीय के रूप में वहाँ की ज़मीन पर बसी है। कहीं पहली पीढ़ी है कहीं दूसरी या तीसरी पीढ़ी है। सबकी अपनी एक शैली है। वहाँ के होकर वहाँ का न होना, बच्चों को वहाँ रखकर, उन्हें वहाँ के प्रभावों से बचाये रखने का प्रयत्न करना, भारत से दूर उन्हें भारतीय बनाये रखना,

  • गुरु गूगल दोऊ खड़े

    आज के ज़माने में गुरु का हाल देख कर दिल दहल उठता है। तुलसी दास जी ने लिखा है “मातु पिता अरू गुरु की बानी/बिनहि विचार करिय शुभ जानी” पर लगता है इस चौपाई में से अब गुरु को बाहर निकालने का समय आ गया है। आज गुरु पर भरोसा करना शिष्य को भारी पड़ सकता है। गुरु गुरुता खो चुके हैं। इतना ही नहीं आज गुरु के न जाने कितने विकल्प आ गये हैं।

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