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  • वंशीधर शुक्ल का काव्य

    शुक्ल जी की कविताएँ ग्राम्य जीवन का जीवन्त दृश्य उपस्थित करने में तो सक्षम हैं ही साथ ही राजनीतिक चेतना का आदर्श रूप भी हमारे सम्मुख प्रस्तुत करती हैं। शुक्ल जी ने कृषकों और श्रमिकों की दयनीय स्थिति और शोषण का सजीव चित्रण किया है। उनके संघर्ष और त्रासदपूर्ण जीवन का वास्तविक प्रतिबिम्ब वंशीधर जी के काव्य में देखा जा सकता है। 

  • उसने लिखा था

    भारत में 1960 का दशक स्वप्नभंग तथा कठोर यथार्थ से संघर्ष का रहा। चीन तथा पाकिस्तान से युद्ध, जवाहरलाल नेहरू तथा लाल बहादुर शास्त्री का निधन, अकाल, ग़रीबी - भारतवासी अब देशभक्ति के अतिरिक्त व्यक्तिगत स्वार्थ के बारे में भी चिंतित होने लगे। इस काल में विद्याभूषण ’श्रीरश्मि’ की रचनाएँ अत्यंत प्रचलित हुईं। ’उसने लिखा था’ में सम्मिलित हिन्दी अकादमी पुरस्कार सम्मानित ’श्रीरश्मि’ की दस कहानियाँ निर्दोष हास्य, व्यंग्य, आध्यात्म, प्रणय, आडंबर, स्वार्थपरता, स्नेह, स्वाभिमान,

  • अम्बर बाँचे पाती

    ... साँझ और रात भी कम सुन्दर नहीं। साँझ होते ही स्वर्णिम धूप के पन्ने गुलाबी होने लगे हैं, कहीं सिन्दूरी साँझ होने पर आकाश का लोहित होना और धूप का लेटना, घुली चाँदनी का आँगन के कसोरे में उतरने का रूपक, सर्द चाँदनी का रात भर चुम्बन उलीचना अभिव्यक्ति सौन्दर्य में रंग भर देते हैं-

    • साँझ ढली तो / स्वर्ण धूप के पन्ने / हुए गुलाबी।
    • सिंदूरी साँझ / गगन है लोहित /

  • दर्शन

    प्रेम के असीम दरिया के पार है मंज़िल तेरी,
    डूबकर मर-मिटने से दिले नादान क्यों घबराते हो?
    समर्पण का तिनका ही ले जाएगा भवसागर के पार,
    दिल के दर्पण में ईश्वर की परछाइयाँ क्यों बनाते हो?​

    - दर्शन

    हार कर अस्तित्व अपना, जो सर्वस्व पाता है,
    जो हरे हर तम को, वो हरि कहलाता है।

    - राम हरे कृष्ण

     

    साँसों की आरी काट रही है,
    मन पर

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