सामाजिक
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  • नक्सली राजा का बाजा एवं अन्य कहानियाँ

    प्रदीप श्रीवास्तव उन बिरले रचनाकारों में हैं जो घटनाओं और व्यक्तियों के मनोविज्ञान की बारीक़ियों की सूक्ष्म पड़ताल करते हैं। फिर ऐसे परत दर परत खोलते हैं कि आम व्यक्ति हो या शिक्षित, सभी देश को अस्थिर करने की सारी चालें समझ जागरूक होता है। कहानियाँ इसी वज़ह से लंबी होती हैं पर उनमें कसावट, रोचकता और घटनाओं का तेज़ प्रवाह होता है।

    —डॉ. सन्दीप अवस्थी 
    आलोचक, फ़िल्म लेखक

  • संभावनाओं की धरती - कैनेडा गद्य संकलन

    कैनेडा के गद्य संकलन ’संभावनाओं की धरती’ में गद्य की अनेक विधाओं के समर्थ भविष्य का संभावना चित्र उकेरते २१ लेखक आपको दिखाई देंगे।ये गद्य रचनाएँ आप्रवासी भारतीयों के संघर्ष और शक्ति, सुख और दुख, अकेलेपन से मित्र-समूह बनाने और नए समाज में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करवाने तक की यात्राओं के अनुभवों को दिखाती हैं।

  • ज़िंदगी की परिभाषा

    मेरे दिल में भी बहुत सारी बातें थीं जो किसी से कहना तो चाहते थे पर कह नहीं पाए। इससे पहले की मेरी ज़िन्दगी की परिभाषा बदले मैंने उसके लिए काग़ज़ क़लम का सहारा लिया और अपने दिल की सारी बातें उसमें लिख डालीं जिससे दिल को आराम भी मिल गया और ये किताब भी बन गई। इसमें मैंने कुछ ऐसी आँखों देखी और कुछ पढ़ी हुई कहानियों को सम्मिलित किया है जिन्होंने मेरे दिल

  • क्षमा करना पार्वती

    आधुनिक समाज के मानवीय संबंधों में जीवन के अर्थ खोजती, जीवन का उत्सव मनाती और दैनिक जीवन से संघर्षरत पात्रों की कहानियाँ - जिनसे आप स्वयं को जुड़ा हुआ पाएँगे - सुमन कुमार घई संपादक - sahityakunj.net

    यह कहानियाँ मात्र कहानियाँ नहीं है, यह सुख - दुख के साथ जिया गया जीवन है। इन कहानियों में कहीं न कहीं आप ख़ुद को ढूँढ़ पाएँगे बस इतना कह सकता हूँ। मन के किसी भी कोने में

  • उसने लिखा था

    भारत में 1960 का दशक स्वप्नभंग तथा कठोर यथार्थ से संघर्ष का रहा। चीन तथा पाकिस्तान से युद्ध, जवाहरलाल नेहरू तथा लाल बहादुर शास्त्री का निधन, अकाल, ग़रीबी - भारतवासी अब देशभक्ति के अतिरिक्त व्यक्तिगत स्वार्थ के बारे में भी चिंतित होने लगे। इस काल में विद्याभूषण ’श्रीरश्मि’ की रचनाएँ अत्यंत प्रचलित हुईं। ’उसने लिखा था’ में सम्मिलित हिन्दी अकादमी पुरस्कार सम्मानित ’श्रीरश्मि’ की दस कहानियाँ निर्दोष हास्य, व्यंग्य, आध्यात्म, प्रणय, आडंबर, स्वार्थपरता, स्नेह, स्वाभिमान,

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