प्रदीप श्रीवास्तव की पुस्तकें
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  • मन्नू की वह एक रात

    …. कह कर मन्नू अपने स्टडी रूम में चली गई। उसे जाते हुए बिब्बो पीछे से देखते रही। उसको देखकर उसने मन ही मन कहा - हूं ..... किताबें ... इन्होंने तुझे भटका दिया बरबाद कर दिया। पर नहीं किताबें तो सिर्फ़ बनाती हैं। किताबों ने तुम्हें नहीं बल्कि सच यह है कि तुमने किताबों को बरबाद किया। वह तो पवित्र होती हैं तुमने उन्हें अपवित्र कर बदनाम किया। एक से एक अनर्थकारी बातें

Author's Info

प्रदीप श्रीवास्तव

जन्म:  लखनऊ में 1 जुलाई, 1970
प्रकाशन:

  • मन्नू की वह एक रात (उपन्यास) अप्रैल 2013 में प्रकाशित 
  • दो कहानी संग्रह, नाटक एवं पुस्तक समीक्षाओं का संग्रह शीघ्र प्रकाश्य
  • कहानी एवं पुस्तक समीक्षाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित

संपादन:

  • हर रोज सुबह होती है (काव्य संग्रह) एवं वर्ण व्यवस्था पुस्तक का संपादन

संप्रति:

  • लखनऊ में ही लेखन, संपादन कार्य में संलग्न

ई-मेल: pradeepsrivastava.70@gmail.com