मुरली श्रीवास्तव की पुस्तकें
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  • गुरु गूगल दोऊ खड़े

    आज के ज़माने में गुरु का हाल देख कर दिल दहल उठता है। तुलसी दास जी ने लिखा है “मातु पिता अरू गुरु की बानी/बिनहि विचार करिय शुभ जानी” पर लगता है इस चौपाई में से अब गुरु को बाहर निकालने का समय आ गया है। आज गुरु पर भरोसा करना शिष्य को भारी पड़ सकता है। गुरु गुरुता खो चुके हैं। इतना ही नहीं आज गुरु के न जाने कितने विकल्प आ गये हैं।

Author's Info

मुरली श्रीवास्तव

 इलाहाबाद
अध्ययन: बी.ई. मैकेनिकल इंजीनियरिंग (जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली)
पुस्तक: सत्य जीतता है (हिन्दी अकादमी दिल्ली से प्रकाशित), घोड़ा ब्रांड क्रिकेटर व मेरे इक्यावन व्यंग्य (प्रेस में)
प्रकाशन: नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान दैनिक, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा, नई दुनिया, मेरी सहेली, जागरण सखी सहित विभिन्न दैनिक व पत्रिकाओं में एक हज़ार से अधिक रचनाएँ प्रकाशित व निरन्तर प्रकाशन जारी है।