पुस्तक बाज़ार की पुस्तकें
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  • शृंगबेरपुर की कथा

    शृंगबेरपुर इलाहाबाद जिले के प्रयाग स्टेशन से रायबरेली  जाने वाली ईआई रेलवे लाइन में स्थित "रामचौरा रोड" नामक रेलवे स्टेशन से डेढ़ मील की दूरी पर स्थित है जो प्रयाग  से 20 मील (36 किलोमीटर) उत्तर पश्चिम गंगा के उत्तर तट पर ऊँचे टेकरे पर बसा है। यहाँ पर सिंगरौर और शृंगबेरपुर ये दो स्थान आधा मील के अन्तर पर स्थित है।

                इस स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है परन्तु यह भारत

  • ठगिनी और अन्य कहानियाँ

                    रातों के साथ जाने कितने राज़ जुड़े होते हैं। इसी लिये रातों के क़िस्से हमेशा दिलचस्प हुआ करते हैं। लेकिन रातों के अक्सर क़िस्से रातों की तरह स्याह हुआ करते हैं। रात की तारीक़ी में अक्सर, एक दूसरी ही जमात रिज़्क़ की तलाश में निकलती है। यह जमात भी दिन में कारोबार करने वाली जमातों से मिलती-जुलती, लेकिन कई बार बिल्कुल अलग होती है। इनके कारोबार भी

  • मन की पीर

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    पोस्टर की पंक्तियाँ पढ़ते हुए संतो ने प्रण किया कि अगर उसे जीत हासिल हुई तो वह अवश्य ही इन सब बातों को पूरा करेगी। इसी के साथ उसे उस दिन की घटना याद हो आई जब दद्दन भइया उसके द्वार पर आये थे और उसे ख़ूब खरी-खोटी सुनाकर वापस लौटे थे। उससे उसे बड़ा दुःख हुआ और शायद नफ़रत भी। वह दद्दन की बड़ी इज़्ज़त करती थी। उन्होंने उस पर बड़े एहसान

  • शिष्टाचार के बहाने

    पुलिस मुहकमे में फरमान जारी हुआ कि वे शिष्टाचार सप्ताह मनाएँगे।
    आम जनता का दहशत में आना लाज़िमी सा हो गया।
    वे किसी भी पुलिसिया हरकत को सहज में लेते नहीं दीखते।
    डंडे का ख़ौफ़ इस कदर हावी है कि सिवाय इसके, वर्दी के पीछे सभ्य सा कुछ दिखाई नहीं देता। पुलिस के हत्थे आप चढ़ गए, तो पुरखों तक के रिकार्ड और फ़ाइल वे मिनटों में डाउनलोड करवा लेते

  • मन्नू की वह एक रात

    …. कह कर मन्नू अपने स्टडी रूम में चली गई। उसे जाते हुए बिब्बो पीछे से देखते रही। उसको देखकर उसने मन ही मन कहा - हूं ..... किताबें ... इन्होंने तुझे भटका दिया बरबाद कर दिया। पर नहीं किताबें तो सिर्फ़ बनाती हैं। किताबों ने तुम्हें नहीं बल्कि सच यह है कि तुमने किताबों को बरबाद किया। वह तो पवित्र होती हैं तुमने उन्हें अपवित्र कर बदनाम किया। एक से एक अनर्थकारी बातें

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